"सत्कर्म रूपी बीज पूर्ण रूप से अवश्य अंकुरित होता है"
मनुष्य जीवन में जितना भी सत्कर्म रूपी बीज बोता है
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| सत्कर्म बीज बोने वाले को फल अवश्य मिलता है |
उसको उतना अंकुरित पौधा रूपी संपूर्ण फल अवश्य प्राप्त होता है
परमात्मा के खेत में कोई भी सत्कर्म रूपी बीज विफल नहीं जाता
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