About Pramod Krishna Shastri

                     !! जीवन परिचय !!

प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज का जन्म सन् 1990 दिन शनिवार को उत्तर प्रदेश औरैया जिले के धर्मपुर नामक ग्राम में एक ब्राह्मण कुल में हुआ।

 इनकी माता श्रीमती सुधा अवस्थी एवं पिता पंडित श्री राम सेवक अवस्थी जी बहुत ही धर्म परायण है।
Pramod krishna Shastri
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महाराज श्री बचपन से ही भगवत कथा एवं भजनों में अत्यंत रुचि लेते थे। इनके बाबा श्री वैकुंठ नारायण अवस्थी बाल्यावस्था में ही महाराज श्री को रामचरितमानस (रामायण)का पाठ पढ़ाते और भगवान श्री राम की कथाओं को सुनाते उन कथाओं को सुनकर के महाराज श्री को बड़ा ही आनंद प्राप्त होता था। महाराज श्री ने गांव में रहते हुए नैपलापुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 8 तक की प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की।

समय का परिवर्तन हुआ महाराज श्री के माता पिता अपना गांव छोड़कर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ शहर में अपना स्वयं का मकान बनाकर रहने लगे।
महाराज श्री के पिता कर्मकांड एवं ज्योतिष के द्वारा अपने परिवार का पालन पोषण करने लगे।

महाराज श्री ने लखनऊ के देश भारती पब्लिक इंटर कॉलेज में कक्षा 10 की माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की।
किंतु महाराज श्री को अंग्रेजी विषय में अधिक रुचि नहीं थी।
           वह संस्कृत शिक्षा एवं वेद पुराणों का अध्ययन करना चाहते थे।
महाराज श्री के हृदय में उनके बाबा के द्वारा भगवान श्री राम की कथाएं सुनकर ऐसा दीप जला जिससे उनका मन वेद पुराणों में ही लगने लगा। उन्होंने अपने माता पिता से प्रार्थना करी कि मुझे संस्कृत शिक्षा एवं वेद पुराणों का अध्ययन करना है । आखिर एक दिन माता पिता ने आज्ञा दे ही दी।
                         महाराज श्री अयोध्या धाम भगवान श्री राम की नगरी में पहुंचे। वहां श्री हनुमान गढ़ी स्थित श्री श्री 108 महंत कमल दास जी महाराज के आश्रम में रहने लगे ।
          निकट में ही श्री हनुमत संस्कृत विद्यालय में व्याकरण ज्योतिष एवं शुक्ल यजुर्वेद का अध्ययन करने लगे,
       समय बीता महाराज श्री यहीं नहीं रुके उन्होंने ज्योतिष व्याकरण शुक्ल यजुर्वेद का अध्ययन कर जैसे ही अपने घर की ओर वापस आए ।
        तभी उनके मन में विचार उत्पन्न हुआ कि मुझे भागवत पुराण का भी अध्ययन करना चाहिए जिससे भागवत कथा के द्वारा सनातन धर्म का प्रचार प्रसार कर सकें, और लोगों का कल्याण हो सके ।
एक दिन महाराज श्री माता पिता की आज्ञा लेकर मथुरा वृंदावन भगवान श्री कृष्ण की नगरी में पहुंचे।
                          जहां यमुना के किनारे केसी घाट स्थित श्रीमद् भागवत विद्यालय में भागवत मर्मज्ञ पूज्य गुरुदेव श्री अयोध्या प्रसाद जी से भागवत महापुराण का अध्ययन करने लगे।
 देखते ही देखते महाराज श्री ने कथा का अध्ययन करते हुए 17 वर्ष की अल्पायु में ही लखनऊ शहर के राजा जी पुरम स्थित टडियन हनुमान मंदिर मैं प्रथम बार संगीत में श्रीमद्भागवत कथा का गायन किया।
                     कथा श्रवण कर समस्त भक्त भाव विभोर हो गए कथा श्रोताओं ने कथा को बहुत सराहा इससे महाराज जी का आत्मविश्वास और मजबूत हो गया।
 महाराज श्री ने भागवत कथाएं करते हुए भी अपनी शिक्षा को रुकने नहीं दिया उन्होंने वाराणसी (काशी) स्थित संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से शास्त्री की डिग्री प्राप्त की।
                             संपूर्ण भारतवर्ष में महाराज श्री के मुखारविंद से सैकड़ों कथाएं संपन्न हो चुकी हैं महाराज श्री ने धन को कभी महत्व नहीं दिया उन्होंने सनातन धर्म के प्रचार प्रसार हेतु निशुल्क भागवत कथा रूपी ज्ञान की वर्षा कर भक्तों के हृदय में ज्ञान की ज्योति जलाई ।
महाराज श्री ने गौ रक्षा एवं गौ सेवा का भी संकल्प लिया।
उन्होंने गौ सेवा हेतु श्री "श्री राधाकृष्ण गौ सेवा संस्थान" का निर्माण किया जिसके अंतर्गत गायों की रक्षा व सेवा कार्य को देखते हुए विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल ने महाराज श्री को लखनऊ महानगर गौरक्षा प्रमुख का दायित्व प्रदान किया।
                         महाराज श्री ने गौरक्षा प्रमुख का कार्य बहुत ही निष्ठा पूर्वक निर्वहन किया वर्तमान में श्रीमद् भागवत कथाओं के माध्यम से महाराज श्री गौ रक्षा एवं गौ सेवा की ज्योति जन जन में जला रहे हैं। 

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