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Saturday, January 5, 2019

यदि_कोई_अपमान_करता_है_तो_क्या_करना_चाहिए

कभी कभी ना चाह कर भी व्यक्ति को अपमान सहन करना पड़ता है।
          लेकिन जीवन में एक बात हमेशा याद रखना चाहिए अपमान सहन करना बहुत ही सरल है लेकिन सम्मान सहन करना ज्यादा कठिन है।
अपमान को पचाना  बहुत सरल है उसे कोई भी पचा सकता है
Pramod krishna shastri
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अपितु सम्मान को बचाना हर किसी के बस की बात नहीं है ।
अब यह कैसे पता चले कि सम्मान पच नहीं रहा है।
  सम्मान किसे कहते हैं सम्मान कैसे होता है हम कहीं जाते हैं लोग मालाएं पहनाते हैं सम्मान करते हैं ऊंची कुर्सी प्रदान करते हैं यही तो समान होता है जब हमारे मन में यह बात आने लगे कि मैं सम्मान का हकदार हूं मुझे सम्मान मिल रहा है मुझे मालाएं पहनाई जा रही हैं यह बहुत अच्छी बात है
 मैं इसके काबिल हूं और मुझे सम्मान मिलना ही चाहिए यह  यह विचार करने लगे कि मैं सम्मान का हकदार हूं।
 मैं बहुत ज्ञानी हूं मुझे सम्मान मिलना ही चाहिए अभी तो कम मालाएं पहनाई गई है और ज्यादा मालाएं पहनाई जानी चाहिए थी मैं इसका हकदार हूं मेरा सम्मान होना ही चाहिए तो समझ लीजिए कि उसको सम्मान पच नहीं रहा है 
अपमान को सहन करने में बहुत लाभ होता है क्योंकि जब हमारा अपमान होता है तो हमारे पाप नष्ट होते हैं
  और हमें जब सम्मान ज्यादा मिलने लगता है तो हमारे पुण्य नष्ट होने लगते हैं  इसलिए हमें सम्मान की ज्यादा चेष्टा नहीं रखनी चाहिए


जो प्यार करते हैं अपमान को
                     वह पा लेते हैं भगवान को !!

1 -विभीषण का अपमान हुआ रावण ने भरी सभा में विभीषण को लात मारी उनका बहुत घोर अपमान हुआ उसके बदले में उन्हें क्या प्राप्त हुआ ,भगवान श्रीराम प्राप्त हो गए



2-ध्रुव जी महाराज का अपमान हुआ ध्रुव जी की सौतेली मां ने ध्रुव जी को उनके पिता उत्तानपाद जी की गोद से पृथ्वी पर गिरा दिया ध्रुव जी का बहुत अपमान किया अपमान होने के कारण उनको बदले में भगवान नारायण की प्राप्ति हो गई



3-द्रोपती का अपमान हुआ भरी सभा में चीरहरण हुआ उस अपमान को द्रोपती महारानी ने सहन किया तो भगवान श्री कृष्ण के प्राप्ति हो गई



4-विदुर जी महाराज का अपमान हुआ भरी सभा में उन्होंने भी अपमान को सहन किया मंत्री पद को त्याग कर दिया उन्हें भगवान श्री कृष्ण को प्राप्त किया

अपमान को सहन करना चाहिए अपमान से घबराना नहीं चाहिए अगर आपने अपमान करने के लायक कोई कार्य नहीं किया तो बिल्कुल भी मत घबराइए समझ लीजिए कि आप के पाप नष्ट हो रहे हैं और एक न एक दिन आपका समाज में सम्मान बढ़ेगा प्रभु की प्राप्ति होगी !!

Saturday, December 29, 2018

#prem_ki_dor_bahut_majbut_hoti_hai

💞प्यारे प्रेम की डोर बहुत नाज़ुक होती है,, लेकिन मजबूत भी इतनी होती है कि ,वह ईश्वर को भी बांध सकती है💞!!
Pramod krishna Shastri
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Wednesday, December 12, 2018

#किसी_का_भी_जीवन_चुनौतिओं_से_रहित_नहीं_है_लेकिन_उनका_सामना_हम_कैसे_करते_हैं_यह_समझना_है

महाभारत में कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा "मेरी माँ ने मुझे जन्मते ही त्याग दिया, 
              क्या ये मेरा अपराध था कि मेरा जन्म एक ऐसे बच्चे के रूप में हुआ? जिसके कारण किसी ने मुझे सम्मान ही नहीं दिया ,

दोर्णाचार्य ने मुझे शिक्षा देने से मना कर दिया क्योंकि वो मुझे         क्षत्रीय नही मानते थे, क्या ये मेरा कसूर था..

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श्री कृष्ण मंद मंद मुस्कुराते हुए बोले-
"कर्ण, मेरा जन्म जेल में हुआ था। मेरे पैदा होने से पहले मेरी मृत्यु मेरा इंतज़ार कर रही थी। जिस रात मेरा जन्म हुआ ...उसी रात मुझे मेरे माता-पिता से अलग होना पड़ा...

मैने गायों को चराया और गोबर को उठाया।
जब मैं चल भी नही पाता था.. तो मेरे ऊपर प्राणघातक हमले हुए।

कोई सेना नही, कोई शिक्षा नही, कोई गुरुकुल नही, कोई महल नही, मेरे मामा ने मुझे अपना सबसे बड़ा शत्रु समझा। बड़े होने पर मुझे ऋषि सांदीपनि के आश्रम में जाने का अवसर मिला।

मुझे बहुत से विवाह राजनैतिक कारणों से या उन स्त्रियों से करने पड़े ...जिन्हें मैंने राक्षसों से छुड़ाया था!
जरासंध के प्रकोप के कारण मुझे अपने परिवार को यमुना से ले जाकर सुदूर प्रान्त मे समुद्र के किनारे बसाना पड़ा...

हे कर्ण!--किसी का भी जीवन चुनौतिओं से रहित नहीं है। सबके जीवन मे सब कुछ ठीक नहीं होता ...
सत्य क्या है और उचित क्या है? ये हम अपनी आत्मा की आवाज़ से स्वयं निर्धारित करते हैं!

इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कितनी बार हमारे साथ अन्याय होता है,
इस बात से कोई फर्क नही पड़ता* कितनी बार हमारा अपमान होता है,
इस बात से भी कोई फर्क नही पड़ता* कितनी बार हमारे अधिकारों का हनन होता है।

फ़र्क़ सिर्फ इस बात से पड़ता है कि हम उन सबका सामना किस प्रकार कर्मज्ञान के साथ करते हैं..!!

 कर्मज्ञान है तो ज़िन्दगी हर पल मौज़ है वरना समस्या तो सभी के साथ रोज है




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