कभी कभी ना चाह कर भी व्यक्ति को अपमान सहन करना पड़ता है।
लेकिन जीवन में एक बात हमेशा याद रखना चाहिए अपमान सहन करना बहुत ही सरल है लेकिन सम्मान सहन करना ज्यादा कठिन है।
अपमान को पचाना बहुत सरल है उसे कोई भी पचा सकता है
अपितु सम्मान को बचाना हर किसी के बस की बात नहीं है ।
अब यह कैसे पता चले कि सम्मान पच नहीं रहा है।
सम्मान किसे कहते हैं सम्मान कैसे होता है हम कहीं जाते हैं लोग मालाएं पहनाते हैं सम्मान करते हैं ऊंची कुर्सी प्रदान करते हैं यही तो समान होता है जब हमारे मन में यह बात आने लगे कि मैं सम्मान का हकदार हूं मुझे सम्मान मिल रहा है मुझे मालाएं पहनाई जा रही हैं यह बहुत अच्छी बात है
मैं इसके काबिल हूं और मुझे सम्मान मिलना ही चाहिए यह यह विचार करने लगे कि मैं सम्मान का हकदार हूं।
मैं बहुत ज्ञानी हूं मुझे सम्मान मिलना ही चाहिए अभी तो कम मालाएं पहनाई गई है और ज्यादा मालाएं पहनाई जानी चाहिए थी मैं इसका हकदार हूं मेरा सम्मान होना ही चाहिए तो समझ लीजिए कि उसको सम्मान पच नहीं रहा है
अपमान को सहन करने में बहुत लाभ होता है क्योंकि जब हमारा अपमान होता है तो हमारे पाप नष्ट होते हैं
और हमें जब सम्मान ज्यादा मिलने लगता है तो हमारे पुण्य नष्ट होने लगते हैं इसलिए हमें सम्मान की ज्यादा चेष्टा नहीं रखनी चाहिए
जो प्यार करते हैं अपमान को
लेकिन जीवन में एक बात हमेशा याद रखना चाहिए अपमान सहन करना बहुत ही सरल है लेकिन सम्मान सहन करना ज्यादा कठिन है।
अपमान को पचाना बहुत सरल है उसे कोई भी पचा सकता है
![]() |
| Pramod krishna shastri call 8737866555 |
अब यह कैसे पता चले कि सम्मान पच नहीं रहा है।
सम्मान किसे कहते हैं सम्मान कैसे होता है हम कहीं जाते हैं लोग मालाएं पहनाते हैं सम्मान करते हैं ऊंची कुर्सी प्रदान करते हैं यही तो समान होता है जब हमारे मन में यह बात आने लगे कि मैं सम्मान का हकदार हूं मुझे सम्मान मिल रहा है मुझे मालाएं पहनाई जा रही हैं यह बहुत अच्छी बात है
मैं इसके काबिल हूं और मुझे सम्मान मिलना ही चाहिए यह यह विचार करने लगे कि मैं सम्मान का हकदार हूं।
मैं बहुत ज्ञानी हूं मुझे सम्मान मिलना ही चाहिए अभी तो कम मालाएं पहनाई गई है और ज्यादा मालाएं पहनाई जानी चाहिए थी मैं इसका हकदार हूं मेरा सम्मान होना ही चाहिए तो समझ लीजिए कि उसको सम्मान पच नहीं रहा है
अपमान को सहन करने में बहुत लाभ होता है क्योंकि जब हमारा अपमान होता है तो हमारे पाप नष्ट होते हैं
और हमें जब सम्मान ज्यादा मिलने लगता है तो हमारे पुण्य नष्ट होने लगते हैं इसलिए हमें सम्मान की ज्यादा चेष्टा नहीं रखनी चाहिए



