33 कोटिश देवी देवताओं में श्रेष्ठ देवता किसे माने सबसे बड़ा कौन है???
सनातन धर्म में अनेक देवी देवताओं की पूजा की जाती है
इतने देवताओं में मनुष्य का मन बटक जाता है आखिर सर्वश्रेष्ठ हम किसे माने
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| 33 कोटि देवी देवताओं में श्रेष्ठ किसे माने |
मनुष्य समझ नहीं पाता किसकी पूजा करें
24 अवतारों में श्रेष्ठ देवता कौन है
क्या नारायण श्रेष्ठ है
क्या भगवान भोलेनाथ श्रेष्ठ है
या भगवान श्री राम श्रेष्ठ हैं
यह बात हमारे मन में हमेशा चलती रहती है आइए इस बात को समझने के लिए ,
एक उदाहरण से समझना होगा
"कहानी"
एक अंधपुरम नाम का गांव था जिसमें सब अंधे ही रहा करते थे !
1 दिन की बात उस अंध पुरम गांव के पास के रास्ते से एक महावत अपना हाथी लेकर जा रहा था उस हाथी के गले में घंटी लगी हुई थी घंटी हाथी के चलने पर बज रही थी
उस घंटी की आवाज को सुनकर जितने भी अंधे थे सब दौड़ पड़े
यह आवाज कहां से आ रही है आवाज को सुनते हुए हाथी के पास पहुंच गए महावत से पूछा भैया यह क्या है?
महावत ने कहा आपके पास नेत्र नहीं है मैं कैसे बतलाऊं इसको हाथी कहते हैं
नेत्र ना होने के कारण अंधे हाथी को देख नहीं सकते महावत ने कहा आप लोग हाथ से टटोल कर देख लो हाथी कैसा होता है
उन्होंने वैसा ही किया टटोल कर देखा किसी ने हाथी के पैर को पकड़ लिया
किसी ने हाथी के कान को पकड़ कर देखा
किसी ने हाथी के पेट पर हाथ फिराया
किसी ने हाथी की पूछ को पकड़ा और उन्होंने महावत से कहा भैया मैंने आपके हाथी को लिया
अब आप हाथी को ले जा सकते हो समय बीता सभी अंधों के बीच आपस में चर्चा होने लगी एक अंधा दूसरे अंधे से पूछता है भैया बताओ हाथी कैसा होता है जिसने हाथी की पूंछ को पकड़ा था उसने कहा हाथी तो एक डंडे की तरह होता है जिसने हाथी के पैर को पकड़ा था उसने कहा हाथी तो एक खंबे की तरह होता है जिसने हाथी के कान को पकड़ा उसने कहा नहीं आती तो सूप की तरह होता है एक अंधा चिल्लाकर कहने लगा नहीं नहीं हाथी तो दीवाल की तरह होता है क्योंकि उसने हाथी के पेट पर हाथ फिर आया था
अब तो सभी अंधों में लड़ाई होने लगी
कोई कहता डंडे की तरह होता है
कोई कहता है दीवार की तरह होता है
कोई कहता है हाथी सूप की तरह होता है
एक अंधा कहने लगा तो कितने प्रकार का हाथी होता है
कोई कहता डंडे की तरह होता है
कोई कहता है दीवार की तरह होता है
कोई कहता है हाथी सूप की तरह होता है
एक अंधा कहने लगा तो कितने प्रकार का हाथी होता है
एक अचानक वहीं महावत उसी हाथी को लेकर दोबारा उस गांव होते हुए मार्ग से जा रहा था तभी अंधों के कान में वह घंटी की आवाज दोबारा सुनाई दी सभी अंधे दौड़ करके आए महावत से कहा भैया आज आप को बताना पड़ेगा हाथी कैसा होता है महावत ने कहा उस दिन तो आप ने देख लिया था अपने हाथों से हाथी कैसा होता है बोले नहीं मेरे नेत्र नहीं है इसलिए मैंने अपने हाथों से अनुमान लगाया था आज तुम ही बताओ हाथी कैसा होता है
एक अंधा कहने लगा हाथी के डंडे की तरह होता है उसने हाथी की पूंछ को पकड़ा था महावत ने कहा होता है
एक अंधा कहता है क्या हाथी सूप की तरह होता है उसने हाथी के काल को पकड़ा था! जी होता है
एक अंधा कहने लगा नहीं नहीं आती तो एक खंबे की तरह होता है क्योंकि उसने हाथी के पैर को पकड़ा था महावत ने कहा हाथी खंबे की तरह भी होता है
एक अंधा चिल्लाकर के कहने लगा अरे मूर्ख हाथी क्या दस 20 प्रकार का होता है
उसी समय महावत प्रेम से मुस्कुरा कर के बोला भैया हाथी तो एक ही है लेकिन आप के नेत्र ना होने के कारण आप ने इसे देख नहीं पाया
अपने हाथों से जितना अनुमान लगाया , वैसा ही समझ लिया
अपने हाथों से जितना अनुमान लगाया , वैसा ही समझ लिया
हाथी तो एक ही है आपने जिस रूप से उसको बंद नेत्रों से देखा हाथी उसी रूप में दिखने लगा
मित्रों उसी प्रकार से परमात्मा है हम सभी मनुष्य के पास वह नेत्र नहीं हैं जिन नेत्रों से परमात्मा को देखा जा सके हम सभी अंधे हैं
हमारे पास नेत्र ना होने के कारण हम जिस भावना से परमात्मा को देखते हैं
परमात्मा हमें उसी भाव से नजर आने लगता है
जाकी रही भावना जैसी !
प्रभु मूरत देखी तिन तैसी !!
क्या किसी मूर्तिकार ने भगवान को देखा है नहीं उसने अपनी मनो भावना से जो विचार किया जो भावना प्रकट की उसने एक पत्थर को मूर्ति का वही रूप दे दिया जो उसके मन में चल रहा था उसी प्रकार से नारायण है
परमात्मा तो एक ही है
एकम् ब्रह्म द्वितीयो नास्ति
हां लेकिन हम भक्त लोग जिस भी भाव से परमात्मा को भजते हैं जिस भाव से उसका भजन करते हैं परमात्मा उसी भाव से उसी रूप में नजर आने लगता है
किसी एक देवता को श्रेष्ठ मान लो जिस पर आप को पूर्ण रूप से निष्ठा हो विश्वास हो निंदा किसी की मत करो सारे देवी देवता उसी ने समाहित हो जाएंगे!!
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"राष्ट्रीय भागवत कथा प्रवक्ता"
प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज
श्री धाम वृंदावन म
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