परमात्मा एक बार अवसर सभी को देता हैं ,आप उसका सदुपयोग कर पाते हैं कि नहीं यह आप पर निर्भर करता है
एक बार एक राजा ने प्रसन्न होकर एक लोहार को अपना चन्दन का बाग भेंट कर दिया , बिचारे लोहार को चंदन के बाग ओर चंदन की किमत पता नही थी अतः वो रोज चंदन की लकड़ी काट काट कर जलाता ओर उसका कोयला बनाकर बेचकर अपनी जीविका चलाने लगा![]() |
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तब लोहार ने एक टुकड़ा जो जलाया नही था वो राजा को दिखाया राजा ने कहा कि जाओ इसे किसी चंदन के व्यापारी के पास ले जाओ और बेच दो ,
लोहार गया और उसे बेचा तो उसे बहुत सारा पैसा मिला लोहार सोचने लगा कि इतना सा टुकड़ा बेचा ओर इतना पैसा मिला पूरे बाग की लकड़ी बेचता तो मेरा जीवन यापन उससे ही हो जाता और वो रोने लगे गया ओर राजा से कहने लगा राजन मुझे एक बाग ओर देदो राजा कहता है कि ऐसा अवसर बार बार नही मिलता....
साधर्मी महानुभावों आपको ये मनुष्य भव उस लोहार को चंदन के बाग जैसा मिला है उसे कोयला बनाओ या चंदन ये आपके हाथ है जीवन के अंत समय मे जब कुछ पल शेष होते है तब धर्म का रास्ता चुनने का प्रयास करते हो तब ऐसा लगता है कि हे भगवान मुझे थोड़ा जीवन और देदो लेकिन तब ऐसा संभव नही होता....मनुष्य जीवन अनमोल है ऐसा जीवन दुबारा नही मिलेगा...
सारांश... मनुष्य जीवन अनमोल है इसे चंदन बनाओ या कोयला ये आप ही को तय करना है ..

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