Sunday, October 28, 2018

हमारे ,आप के जीवन पर आधारित ,बहुत ही ज्ञानवर्धक कथा एक बार अवश्य पढ़ें!!

हमारे ,आप के जीवन पर आधारित ,बहुत ही ज्ञानवर्धक कथा एक बार अवश्य पढ़ें!!

"कर्म करो तो फल मिलता है,                  
      आज नहीं तो कल मिलता है,
                जितना गहरा अधिक हो कुआँ,    
               उतना मीठा जल मिलता है   टक
       जीवन के हर कठिन प्रश्न का,            
                   जीवन से ही हल मिलता है !!
Pramod Krishna Shastri 

एक गाँव में एक किसान रहता था उसके परिवार में उसकी पत्नी और एक लड़का था। कुछ सालों के बाद पत्नी की मृत्यु हो गई उस समय लड़के की उम्र दस साल थी।

किसान ने दूसरी शादी कर ली। उस दूसरी पत्नी से भी किसान को एक पुत्र प्राप्त हुआ।किसान की दूसरी पत्नी की भी कुछ समय बाद मृत्यु हो गई।

किसान का बड़ा बेटा जो पहली पत्नी से प्राप्त हुआ था जब शादी के योग्य हुआ तब किसान ने बड़े बेटे की शादी कर दी।

फिर किसान की भी कुछ समय बाद मृत्यु हो गई। किसान का छोटा बेटा जो दूसरी पत्नी से प्राप्त हुआ था और पहली पत्नी से प्राप्त बड़ा बेटा दोनों साथ साथ रहते थे।

कुछ समय बाद किसान के छोटे लड़के की तबियत खराब रहने लगी। बड़े भाई ने कुछ आस पास के वैद्यों से इलाज करवाया पर कोई राहत ना मिली। छोटे भाई की दिन ब दिन तबियत बिगड़ती जा रही थी और बहुत खर्च भी हो रहा था।

एक दिन बड़े भाई ने अपनी पत्नी से सलाह की कि यदि ये छोटा भाई मर जाए तो हमें इसके इलाज के लिए पैसा खर्च ना करना पड़ेगा।

और जायदाद में आधा हिस्सा भी नहीं देना पड़ेगा। तब उसकी पत्नी ने कहा कि क्यों न किसी वैद्य से बात करके इसे जहर दे दिया जाए किसी को पता भी ना चलेगा किसी रिश्तेदारी में भी कोई शक ना करेगा कि बीमार था बीमारी से मृत्यु हो गई।

बड़े भाई ने ऐसे ही किया एक वैद्य से बात की कि आप अपनी फीस बताओ ऐसा करना मेरे छोटे बीमार भाई को दवा के बहाने से जहर देना है !

वैद्य ने बात मान ली और लड़के को जहर दे दिया और लड़के की मृत्यु हो गई।उसके भाई भाभी ने खुशी मनाई की रास्ते का काँटा निकल गया अब सारी सम्पत्ति अपनी हो गई।

उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। कुछ महीनों पश्चात उस किसान के बड़े लड़के की पत्नी को लड़का हुआ !

उन पति पत्नी ने खूब खुशी मनाई, बड़े ही लाड़ प्यार से लड़के की परवरिश की। कुछ ही गिने वर्षों में लड़का जवान हो गया। उन्होंने अपने लड़के की भी शादी कर दी!

शादी के कुछ समय बाद अचानक लड़का बीमार रहने लगा। माँ बाप ने उसके इलाज के लिए बहुत वैद्यों से इलाज करवाया। जिसने जितना पैसा माँगा दिया सब कुछ दिया ताकि लड़का ठीक हो जाए ।

अपने लड़के के इलाज में अपनी आधी सम्पत्ति तक बेच दी पर लड़का बीमारी के कारण मरने की कगार पर आ गया। शरीर इतना ज्यादा कमजोर हो गया की अस्थि-पिंजर शेष रह गया था।

एक दिन लड़के को चारपाई पर लेटा रखा था और उसका पिता साथ में बैठा अपने पुत्र की ये दयनीय हालत देख कर दुःखी होकर उसकी ओर देख रहा था!

तभी लड़का अपने पिता से बोला कि _भाई_ अपना सब हिसाब हो गया बस अब कफन और लकड़ी का हिसाब बाकी है उसकी तैयारी कर लो।

ये सुनकर उसके पिता ने सोचा की लड़के का दिमाग भी काम नहीं कर रहा है बीमारी के कारण और बोला बेटा मैं तेरा बाप हूँ भाई नहीं!

तब लड़का बोला मैं आपका वही भाई हूँ जो आप ने जहर खिलाकर मरवाया था । जिस सम्पत्ति के लिए आप ने मरवाया था मुझे अब वो मेरे इलाज के लिए आधी बिक चुकी है आपकी शेष है हमारा हिसाब हो गया !*

तब उसका पिता फ़ूट-फूट कर रोते हुए बोला कि मेरा तो कुल नाश हो गया। जो किया मेरे आगे आ गया। पर तेरी पत्नी का क्या दोष है जो इस बेचारी को जिन्दा जलाया जाएगा ।
_(उस समय सतीप्रथा थी जिसमें पति के मरने के बाद पत्नी को पति की चिता के साथ जला दिया जाता था)_
तब वो लड़का बोला की वो वैद्य कहाँ है, जिसने मुझे जहर खिलाया था। तब उसके पिता ने कहा की आप की मृत्यु के तीन साल बाद वो मर गया था।

तब लड़के ने कहा कि ये वही दुष्ट वैद्य आज मेरी पत्नी रूप में है मेरे मरने पर इसे जिन्दा जलाया जाएगा ।
हमारा जीवन जो उतार-चढ़ाव से भरा है इसके पीछे हमारे अपने ही कर्म होते हैं। हम जैसा बोएंगे, वैसा ही काटना पड़ेगा।





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      " राष्ट्रीय भागवत कथा प्रवक्ता"
      प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज
     8737866555 9453316276
www.pramodkrishnashastri.com







Friday, October 26, 2018

भगवान भोलेनाथ होंगे प्रसन्न इस स्त्रोत का करें पाठ

भगवान भोलेनाथ होंगे प्रसन्न इस स्त्रोत का करें पाठ!!                   


नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम I
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेअहम II

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा घ्य़ान गोतीतमीशं गिरीशम I
करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोअहम II

तुश्हाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम I
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा II

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम I
  मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि II

 प्रचण्डं प्रकृश्ह्टं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम I
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं भजे.अहं भवानीपतिं भावगम्यम II

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी I
चिदानन्द संदोह मोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी II

न यावत उमानाथ पादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम I
न तावत सुखं शान्ति सन्तापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम II

न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतो.अहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम I
 जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो II

  रुद्राश्ह्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोश्हये I
 ये पठन्ति नरा भक्त्या तेश्हां शम्भुः प्रसीदति II

Thursday, October 25, 2018

कार्तिक मास को कार्तिक (दामोदर) मास क्यों कहते हैं?? कार्तिक (दामोदर) मास का क्या महत्व है??? जानिए

कार्तिक मास को कार्तिक (दामोदर) मास क्यों कहते हैं??
कार्तिक (दामोदर) मास का क्या महत्व है??? जानिए

 कार्तिक (दामोदर) मास का इतना माहत्म्य क्यों?
_क्योंकि इस मास में भगवान ने बहुत सारी लीलाएँ की हैं_....जो इस प्रकार हैं...



शरद पूर्णिमा= इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी और गोपियों के साथ रास किया था। शरद पूर्णिमा की रात्रि से ही कार्तिक मास शुरू हुआ था।

बहुलाष्टमी= यह दिन राधाकुण्ड,श्यामकुण्ड के आविर्भाव का स्मरणोत्सव है।इसी दिन श्रीकृष्ण और राधारानी ने श्यामकुंड ,राधाकुंड का निर्माण किया था ।

"रमा एकादशी"

धनतेरस= इस दिन धन्वतंरी भगवान अमृत और आयुर्वेद की औषधियों के साथ प्रकट हुए थे।

नरकाचतुर्दशी =इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था|

दामोदर लीला= इसी मास में दिवाली के दिन मैया यशोदा ने भगवान कृष्ण को उखल से बांधा था जिससे उनका नाम दामोदर पड़ा अर्थात जिनका उदर(पेट)दाम (रस्सी) से बंध गया और इसीलिए कार्तिक मास का नाम _*दामोदर मास*_ पड़ा ।

दिवाली =भगवान राम 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटे ।सभी अयोध्यावासियों ने दीप जलाये,जिसे दिवाली के रूप में आज भी हम मानते हैं ।

गोवर्धन पूजा*- दिवाली के पश्चात गोवर्धन पूजा की जाती है । भगवान कृष्ण ने अपनी बाएं हाथ की कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया था| इस दिन भगवान को _56भोग_ लगाये जाते हैं ।

 गोपष्टमी= भगवान कृष्ण ने गाय चराना शुरू किया ।

उत्थान एकादशी= (देवउठनी एकादशी) -इस दिन 4 महीनों बाद भगवान उठते हैं।इसीलिए इस एकादशी को देवउठनी एकादशी कहते हैं ।

तुलसी विवाह= भगवान श्रीकृष्ण और तुलसी महारानी का विवाह होता हैं । 
     

"कार्तिक मास में भगवान श्रीकृष्ण के आगे संध्या समय दिया अर्पण करने का विशेष महत्व है !
 " इस विषय में "
पद्म पुराण में कहा गया है....
"कार्तिक मास में मात्र एक दीपक अर्पित करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं !
Pramod Krishna Shastri 













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         राष्ट्रीय भागवत कथा प्रवक्ता
प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज ,श्री धाम वृंदावन,
 www.pramodkrishnashastri.com
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Wednesday, October 24, 2018

करवा चौथ व्रत का शुभ मुहूर्त ,पति पत्नी में नहीं होगा झगड़ा यह करें उपाय, पढ़ें...

करवा चौथ व्रत का शुभ मुहूर्त ,पति पत्नी में नहीं होगा झगड़ा यह करें उपाय, पढ़ें...

करवा चौथ दिनांक 27 अक्टूबर 2018 दिन शनिवार को है। 

इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निराजल व्रत रखकर रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद उसे अर्ध्य देकर व्रत खोलती हैं। 
महिलाएं सोलह श्रृंगार  करती हैं
करवा चौथ व्रत
, मंगलसूत्र, मांग टीका, बिंदिया ,काजल, नथनी, कर्णफूल, मेहंदी, कंगन, लाल रंग की चुनरी, बिछिया, पायल, कमरबंद, अंगूठी, बाजूबंद और गजरा धारण करती हैं। कुंवारी लड़कियां भी सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए यह व्रत कर सकती हैं।

 करवा चौथ पूजा का मुहूर्त शाम 5.40 से 6.47 तक व चंद्रोदय शाम 7:35 बजे। लेकिन चतुर्थी तिथि 7:58 बजे से ही शुरू हो रही है ऐसे में 7:58 के बाद ही अर्घ्य देना ठीक रहेगा।
      जिन व्यक्तिओ की पत्नी बीमार है या किसी कारण से व्रत नहीं कर सकती, उनके पति व्रत रख सकते है।   

पति - पत्नी मे झगड़ा - मनमुटाव कम करने के लिए करवाचौथ के दिन झाडू की दो सींकों को उलटा और सीधा क्रम में नीले धागे से बांधकर घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना से वैवाहिक जीवन में तनाव कम होता है।

यदि पति कहीं और आकृषित हो गया हो, पति किसी अन्य स्त्री से प्रेम करने लगा हो , अगर स्त्री किसी अन्य पुरुष से आकर्षित हो रही हो किसी दूसरे पुरुष से प्रेम करने लगी हो,वैवाहिक जीवन मे परेशानी आ रही हो, तो करवाचौथ वाले दिन गौरी शंकर नेपाली रुद्राक्ष धारण करें
        रुद्राक्ष धारण करने की विधि सबसे पहले रुद्राक्ष को गौ दुग्ध से स्नान कराएं ,गंगाजल से स्नान कराएं गाय के मूत्र से स्नान कराएं लाल रोली लगाने के बाद उसको भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर कुछ समय के लिए रख दें इसके बाद उसको धारण करें!

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सुंदर प्रसंग पूरा पढ़ें...
एक तोते की कथा, जीवन में गुरु का क्या महत्व होता है पढ़ें??

एकपंडित रोज रानी के पास कथा करता था। कथा के अंत में सबको कहता कि ‘राम कहे तो बंधन टूटे....


  राष्ट्रीय भागवत कथा प्रवक्ता
 प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज
       श्री धाम वृंदावन
WhatsApp 8737866555

Tuesday, October 23, 2018

एक तोते की कथा, जीवन में गुरु का क्या महत्व होता है पढ़ें??Pramod Krishna Shastri

एक तोते की कथा, जीवन में गुरु का क्या महत्व होता है पढ़ें??

एक पंडित रोज रानी के पास कथा करता था। कथा के अंत में सबको कहता कि ‘राम कहे तो बंधन टूटे’। तभी पिंजरे में बंद तोता बोलता, ‘यूं मत कहो रे पंडित झूठे’। पंडित को क्रोध आता कि ये सब क्या सोचेंगे, रानी क्या सोचेगी। पंडित अपने गुरु के पास गया, गुरु को सब हाल बताया। गुरु तोते के पास गया और पूछा तुम ऐसा क्यों कहते हो?
आज का गुरु मंत्र


तोते ने कहा- ‘मैं पहले खुले आकाश में उड़ता था। एक बार मैं एक आश्रम में जहां सब साधू-संत राम-राम-राम बोल रहे थे, वहां बैठा तो मैंने भी राम-राम बोलना शुरू कर दिया। 
                                        एक दिन मैं उसी आश्रम में राम-राम बोल रहा था, तभी एक संत ने मुझे पकड़ कर पिंजरे में बंद कर लिया, फिर मुझे एक-दो श्लोक सिखाये। आश्रम में एक सेठ ने मुझे संत को कुछ पैसे देकर खरीद लिया। अब सेठ ने मुझे चांदी के पिंजरे में रखा, मेरा बंधन बढ़ता गया। निकलने की कोई संभावना न रही।
         एक दिन उस सेठ ने राजा से अपना काम निकलवाने के लिए मुझे राजा को गिफ्ट कर दिया, राजा ने खुशी-खुशी मुझे ले लिया, क्योंकि मैं राम-राम बोलता था। रानी धार्मिक प्रवृत्ति की थी तो राजा ने रानी को दे दिया। अब मैं कैसे कहूं कि ‘राम-राम कहे तो बंधन छूटे’।

तोते ने गुरु से कहा आप ही कोई युक्ति बताएं, जिससे मेरा बंधन छूट जाए। गुरु बोले- आज तुम चुपचाप सो जाओ, हिलना भी नहीं। रानी समझेगी मर गया और छोड़ देगी। ऐसा ही हुआ। दूसरे दिन कथा के बाद जब तोता नहीं बोला, तब संत ने आराम की सांस ली। रानी ने सोचा तोता तो गुमसुम पढ़ा है, शायद मर गया। रानी ने पिंजरा खोल दिया, तभी तोता पिंजरे से निकलकर आकाश में उड़ते हुए बोलने लगा ‘सतगुरु मिले तो बंधन छूटे’। अतः शास्त्र कितना भी पढ़ लो, कितना भी जाप कर लो, लेकिन सच्चे गुरु के बिना बंधन नहीं छूटता।

  




 एक बार पढ़ें
असफलता ही सफलता की कुंजी



Next pot...
A Single Mantra Can Resolve All Your Problems 
 
  राष्ट्रीय भागवत कथा प्रवक्ता
 प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज 
श्री धाम वृंदावन मथुरा उत्तर प्रदेश
 8737866555 9453316276


आज शरद पूर्णिमा विशेष महत्व पूरा पढ़े??? पूजन करने से धन की होगी वर्षा Pramod Krishna Shastri

आज शरद पूर्णिमा विशेष महत्व पूरा पढ़े???
पूजन करने से धन की होगी वर्षा

इस बार शरद पूर्णिमा तिथि की शुरुआत आज रात मंगलवार 10/16 को हो रही है और इसका समापन (24) अक्टूबर  बुधवार रात 10/18को होगा। व्रत एवं पूजा (24)अक्टूबर (कल) बुधवार को  ही होगा। व्रती रात्रि में चन्द्रोदय होने के बाद गन्ध,चन्दन,अक्षत,पुष्प,धूप,दीप,नैवेद्य,फल,ताम्बूल दक्षिणादि से पूजन करें

इस मंत्र का जाप करें 21 माला
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यी नमः

 !! चन्द्रार्घ्य निम्न मन्त्र द्वारा करें!!
 🕉ॐक्षीरोदार्णवसम्भूतं अत्रिगोत्रसमुद्भवम्।
गृहाणार्घ्यंशशांकेदं रोहिणी सहितो मम।।
प्रदान कर प्रणाम करे।
🕉 ॐदधिशंखतुशाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
नमामि शशिनम् सोमं शम्भुर्मुकुट भूषणम्।।
ॐज्योत्सनानां पतये तुभ्यं ज्योतिषां पतये नम:।
नमस्ते रोहिणीकान्त सुधावास नमोस्तु ते।।
मान्‍यता है कि शरद पूर्णिमा ही वो दिन है जब चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्‍त होकर धरती पर अमृत की वर्षा करता है। आमतौर पर हम सुनते हैं कि चंद्रमा में सोलह कलाएं होती हैं। भगवान श्रीकृष्ण को सोलह कलाओं का स्वामी कहा गया है तो राम को बारह कलाओं का। दोनों ही पूर्णावतार हैं। इसकी अलग-अलग व्याख्या मिलती हैं। कुछ की राय में भगवान राम सूर्यवंशी थे तो उनमें बारह कलाएं थीं। श्रीकृष्ण चंद्रवंशी थे तो उनमें सोलह कलाएं थीं।  वर्षभर में शरद पूर्णिमा के ही दिन चांद सोलह कलाओं का होता है। इस रात चांद की छटा अलग ही होती है जो पूरे वर्ष कभी दिखाई नहीं देती। चांद को लेकर जितनी भी उपमाएं दी जाती हैं, वह सभी शरद पूर्णिमा पर केंद्रित हैं।
          🌙चन्द्रमा_की_सोलह_कला:
अमृत, मनदा ( विचार), पुष्प ( सौंदर्य), पुष्टि ( स्वस्थता), तुष्टि( इच्छापूर्ति), ध्रुति ( विद्या), शाशनी ( तेज), चंद्रिका ( शांति),कांति (कीर्ति), ज्योत्सना ( प्रकाश), श्री (धन), प्रीति ( प्रेम),अंगदा (स्थायित्व), पूर्ण ( पूर्णता अर्थात कर्मशीलता) और पूर्णामृत (सुख)। चंद्रमा के प्रकाश की 16 अवस्थाएं हैं। मनुष्य के मन में भी एक प्रकाश है। मन ही चंद्रमा है। चंद्रमा जैसे घटता-बढ़ता रहता है। मन की स्थिति भी यही होती है।इसी पूनम की चांदनी रात्री मे खीर बनाकर प्रात,ग्रहण से चन्द्रमा की अमृतबर्षा रूपी१६कलाओं की प्राप्ति होती है। 
               


     राष्ट्रीय भागवत कथा प्रवक्ता 
    प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज 
            श्री धाम वृंदावन 
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Friday, October 19, 2018

#पापांकुशा_एकादशी _20-9-2018_दिन_शनिवार का विशेष महत्त्व

  पापांकुशा एकादशी  20-9-2018 दिन शनिवार  हिंदू सनातन धर्म मैं एकादशी का विशेष महत्व है

        धर्मराज युधिष्ठिर ने पूछा हे मधुसूदन कृपया यह बताइए कि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में किस नाम की एकादशी होती है? 
            श्री कृष्ण बोले हे राजन आश्विन के शुक्ल पक्ष में पापा कुंशा एकादशी होती है। जो सब पापों का हरण करने वाली तथा उत्तम है। उस दिन संपूर्ण मनोरथ की प्राप्ति के लिए मनुष्य को स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करने वाले पद्मनाभ संज्ञक मुझ वासुदेव का पूजन करना चाहिए। 
जितेंद्रिय मुनि चिरकाल तक कठोर तपस्या करके इस फल को प्राप्त करता है।
Pramod Krishna Shastri 
               वह उस दिन भगवान गरुड़ध्वज को प्रणाम करने से ही मिल जाता है ।
       पृथ्वी पर जितने तीर्थ और पवित्र देवालय हैं उन सब के सेवन का फल भगवान विष्णु के नाम कीर्तन मात्र से मनुष्य को प्राप्त हो जाता है ।जो सारंग धनुष धारण करने वाले सर्व व्यापक भगवान जनार्दन की शरण में जाते हैं, उन्हें कभी यमलोक की यात्रा नहीं भोगनी पड़ती ।यदि अन्य कार्य के प्रसंग से भी मनुष्य एकमात्र मात्र एकादशी का उपवास कर ले तो उसे कभी यम यातना नहीं प्राप्त होगी।

          जो पुरुष विष्णु भक्त हो कर शिव की निंदा करता है वह भगवान विष्णु के लोक में स्थान नहीं पाता, इसी प्रकार से यदि कोई शैव या पाशुपत होकर भगवान विष्णु की निंदा करता है,तो वह  रौरव नरक में डालकर तब तक पकाया जाता है जब तक कि 14 इंद्रो की आयु पूरी नहीं हो जाती। यह एकादशी स्वर्ग और मोक्ष को प्रदान करने वाली, शरीर को निरोग बनाने वाली तथा सुंदर स्त्री, धन एवं मित्र देने वाली है। एकादशी को दिन में उपवास करके रात्रि में जागरण करना चाहिए ।जो ऐसा करता है राजेंद्र वह पुरुष मातृ पक्ष की 10 तथा स्त्री पक्ष की भी 10 पीढ़ियों का उद्धार कर देता है ।

      एकादशी का व्रत करने वाले मनुष्य चतुर्भुज पीतांबर धारी होकर भगवान विष्णु के धाम को जाते हैं ।आशविन  शुक्ल पक्ष में पापाकुंशा का व्रत करने मात्र से मानव सब पापों से मुक्त हो श्री हरि लोक में जाता है। जो पुरुष स्वर्ण, भूमि, जल ,जूते और छाते का दान करता है ।वह कभी यमराज को नहीं देखता है।
          गरीब पुरुष को भी चाहिए कि वह यथा शक्ति स्नान, दान, आदि क्रिया करके अपने प्रत्येक दिन को सफल बनावे ।जो होम, स्नान, जप, ध्यान और यज्ञ आदि पुण्य कर्म करने वाले हैं उन्हें भयंकर यम यातना नहीं देखनी पड़ती है।

            लोक में वह मानव दीर्घायु थनाढय,कुलीन और निरोग देखे जाते हैं । इस विषय में अधिक कहने से क्या लाभ ,मनुष्य पाप से दुर्गत में पड़ते हैं और धर्म से स्वर्ग में जाते हैं। राजन तुमने मुझसे जो कुछ पूछा था उसके अनुसार पापाकुंशा के महत्व का वर्णन कर दिया ।

         "राष्ट्रीय भागवत कथा प्रवक्ता"     

        प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज                 

            श्री धाम वृंदावन 'मथुरा '       

          8737866555 9453316276

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