Monday, November 5, 2018

भगवान का चरणामृत पीने के बाद सिर पर हाथ नहीं फेरना चाहिए क्यों???भगवान के चरणामृत का महत्व???

भगवान का चरणामृत पीने के बाद सिर पर हाथ नहीं फेरना चाहिए क्यों???भगवान के चरणामृत का  महत्व???


अक्सर जब हम मंदिर जाते है तो पंडित जी हमें भगवान का चरणामृत देते है,
                 क्या कभी हमने ये जानने की कोशिश की कि चरणामृतका क्या महत्व है,

❋━━► शास्त्रों में कहा गया है

अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशनम्।
विष्णो: पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते ।।

"अर्थात भगवान विष्णु के चरण का अमृत रूपी जल समस्त पाप -व्याधियों का शमन करने वाला है तथा औषधी के समान है।
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जो चरणामृत पीता है उसका पुनः जन्म नहीं होता" जल तब तक जल ही रहता है जब तक भगवान के चरणों से नहीं लगता, जैसे ही भगवान के चरणों से लगा तो अमृत रूप हो गया और चरणामृत बन जाता है.

❋━━► जब भगवान का वामन अवतार हुआ, और वे राजा बलि की यज्ञ शाला में दान लेने गए !
                      तब उन्होंने तीन पग में तीन लोक नाप लिए जब उन्होंने पहले पग में नीचे के सात अतल वितल सुतल तलाताल महातल रसातल पाताल लोक नाप लिए और दूसरे पैर में ऊपर के सात भू भुवः स्वः मह जन तप और सत्य   नापने लगे तो जैसे ही ब्रह्म लोक में उनका चरण गया तो ब्रह्मा जी ने अपने कमंडलु में से जल लेकर भगवान के चरण धोए और फिर चरणामृत को वापस अपने कमंडल में रख लिया,
             वह चरणामृत गंगा जी बन गई, जो आज भी सारी दुनिया के पापों को धोती है, ये शक्ति उनके पास कहाँ से पात्र शक्ति है भगवान के चरणों की जिस पर ब्रह्मा जी ने साधारण जल चढाया था पर चरणों का स्पर्श होते ही बन गई गंगा जी .

जब हम बाँके बिहारी जी की आरती गाते है तो कहते है -
*चरणों से निकली गंगा प्यारी जिसने सारी दुनिया तारी*

धर्म में इसे बहुत ही पवित्र माना जाता है तथा मस्तक से लगाने के बाद इसका सेवन किया जाता है।
चरणामृत का सेवन अमृत के समान माना गया है।

☝कहते हैं भगवान श्री राम के चरण धोकर उसे चरणामृत के रूप में स्वीकार कर केवट न केवल स्वयं भव-बाधा से पार हो गया बल्कि उसने अपने पूर्वजों को भी तार दिया।

                       चरणामृत का महत्व सिर्फ धार्मिक ही नहीं चिकित्सकीय भी है। चरणामृत का जल हमेशा तांबे के पात्र में रखा जाता है।

       आयुर्वेदिक मतानुसार तांबे के पात्र में अनेक रोगों को नष्ट करने की शक्ति होती है जो उसमें रखे जल में आ जाती है। उस जल का सेवन करने से शरीर में रोगों से लडऩे की क्षमता पैदा हो जाती है तथा रोग नहीं होते।

❋━━► इसमें तुलसी के पत्ते डालने की परंपरा भी है जिससे इस जल की रोगनाशक क्षमता और भी बढ़ जाती है।
❋━━► तुलसी के पत्ते पर जल इतने परिमाण में होना चाहिए कि सरसों का दाना उसमें डूब जाए ।
❋━━► ऐसा माना जाता है कि तुलसी चरणामृत लेने से मेधा, बुद्धि,स्मरण शक्ति को बढ़ाता है।

                         इसीलिए यह मान्यता है कि भगवान का चरणामृत औषधी के समान है। यदि उसमें तुलसी पत्र भी मिला दिया जाए तो उसके औषधीय गुणों में और भी वृद्धि हो जाती है। कहते हैं सीधे हाथ में तुलसी चरणामृत ग्रहण करने से हर शुभ का या अच्छे काम का जल्द परिणाम मिलता है।

    इसीलिए *चरणामृत हमेशा सीधे हाथ से लेना चाहिये !

❋━━► लेकिन चरणामृत लेने के बाद अधिकतर लोगों की आदत होती है कि वे अपना हाथ सिर पर फेरते हैं। चरणामृत लेने के बाद सिर पर हाथ रखना सही है या नहीं यह बहुत कम लोग जानते हैं.?

                दरअसल शास्त्रों के अनुसार *चरणामृत लेकर सिर पर हाथ रखना अच्छा नहीं माना जाता है।*

                 कहते हैं इससे विचारों में सकारात्मकता नहीं बल्कि नकारात्मकता बढ़ती है।

इसीलिए चरणामृत लेकर कभी भी सिर पर हाथ नहीं फेरना चाहिए ।
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   राष्ट्रीय भागवत कथा प्रवक्ता"
   प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज
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Sunday, November 4, 2018

धनतेरस के दिन इस प्रकार करें पूजन" लक्ष्मी जी करेंगी धन की बरसात" धनतेरस पूजन के लिए" शुभ मुहूर्त "जानिए ???

धनतेरस के दिन इस प्रकार करें पूजन" लक्ष्मी जी करेंगी धन की बरसात"
धनतेरस पूजन के लिए" शुभ मुहूर्त "जानिए ???

धनतेरस पूजन विधि
( घर में धन धान्य वृद्धि और सुख शांति के लिए )

दिवाली से पहले धनतेरस पर पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन धन और आरोग्य के लिए भगवान धन्वंतरि- भगवान महामृत्युंजय शिव और लक्ष्मी की पूजा की जाती है, साथ में धन को कमाने और उसके सदुपयोग की सद्बुद्धि के लिए          गायत्री और गणेश के मन्त्रों से पूजा की जाती है।
Pramod Krishna Shastri 











  "प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज"
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1- गुरु आवाहन मंत्र - ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु, गुरुरेव महेश्वरः । गुरुरेव परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः ।।

2 - गणेश आवाहन मन्त्र - ॐ एक दन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दंती प्रचोदयात ।।

3- लक्ष्मी आवाहन मंत्र - ॐ महा लक्ष्म्यै विद्महे, विष्णु प्रियायै धीमहि । तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ।

४ -दीपदान मंत्र ( कम से कम 5 या 11 या 21 घी के दीपकों को प्रज्वल्लित करें )-

ॐ अग्निर्ज्योतिर्ज्योतिरग्नी: स्वाहा । सूर्यो ज्योतिर्ज्योतिः सूर्यः स्वाहा । अग्निर्वर्च्चो ज्योतिर्वर्च्चो स्वाहा । सूर्यो वर्च्चो ज्योतिर्वर्च्च: स्वाहा । ज्योतिः सूर्य्यः सूर्यो ज्योतिः स्वाहा ।।

5 - चौबीस(२४) बार गायत्री मंत्र का जप करें - ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम् , भर्गो देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात् ।

6- तीन बार महामृत्युंजय मंत्र का जप करें -  ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि वर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।।

7 - तीन बार लक्ष्मी गायत्री मंत्र का जप करें -  ॐ महा लक्ष्म्यै विद्महे, विष्णु प्रियायै धीमहि । तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॥

8 - तीन बार गणेश मंत्र का जप करें - ॐ एक दन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

9 - तीन बार कुबेर का मंत्र जप करें -  .ॐ यक्ष राजाय विद्महे, वैश्रवणाय धीमहि, तन्नो कुबेराय प्रचोदयात्॥

10-  तीन बार आरोग्य देवता धन्वन्तरि गायत्री मन्त्र का जप करें-  ॐ तत् पुरुषाय विद्महे, अमृत कलश हस्ताय धीमहि, तन्नो धन्वन्तरि  प्रचोदयात्

11 - शान्तिपाठ - ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ।

दीपक नकारात्मकता का शमन कर सकारात्मक दैवीय शक्तियों को घर में प्रवेश देता है। इसलिए दीपक की जगह विद्युत् से जलने वाली led या किसी भी प्रकार की लाईट नहीं ले सकती। घर के मुख्य् द्वार पर दो घी या सरसों या तिल के तेल के रुई बाती वाले दीपक, एक तुलसी के पास, एक रसोईं में और एक बड़ा मुख्य् दीपक सूर्यास्त के बाद जलाकर रख दें। फिर कलश स्थापना कर पूजन करें। दीपयज्ञ/दीपदान के बाद घर की तिज़ोरी/लेपटॉप/बैंक की पासबुक इत्यादि का पूजन अवश्य करें।

  धनतेरस की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
 शाम 06:37 से लेकर 08:31 तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त में श्री गणेश लक्ष्मी का पूजन करने से धन, स्वास्थ्य और आयु बढ़ती है।

Optional - घर में बना हलवा या खीर प्रसाद में चढ़ाएं। यदि बजट है तो चांदी या स्वर्ण का आभूषण ख़रीद ले शाम 6:30 से पहले, उसे दूध में नहला के पूजन स्थल में साफ़ स्टील की कटोरी में लाल वस्त्र के ऊपर रख लें। उसका तिलक चन्दन कर पूजन के पश्चात् तिज़ोरी में रख दें, दीपावली के दिन पुनः उसका पूजन होगा।
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Thursday, November 1, 2018

जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि


जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि


दृष्टिकोण

 एक महिला रोज मंदिर जाती थी ! एक दिन उस महिला ने पुजारी से कहा अब मैं मंदिर नही आया करूँगी! इस पर पुजारी ने पूछा -- क्यों ?
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 तब महिला बोली -- मैं देखती हूँ लोग मंदिर परिसर में अपने फोन से अपने व्यापार की बात करते हैं !
                      कुछ ने तो मंदिर को ही गपशप करने का स्थान चुन रखा है ! कुछ पूजा कम पाखंड,दिखावा ज्यादा करते हैं!

 इस पर पुजारी कुछ देर तक चुप रहे फिर कहा -- सही है ! परंतु अपना अंतिम निर्णय लेने से पहले क्या आप मेरे कहने से कुछ कर सकती हैं! महिला बोली -आप बताइए क्या करना है?

 पुजारी ने कहा -- एक गिलास पानी भर लीजिए और 2 बार मंदिर परिसर के अंदर परिक्रमा लगाइए । शर्त ये है कि गिलास का पानी गिरना नहीं चाहिये! महिला बोली -- मैं ऐसा कर सकती हूँ!

 फिर थोड़ी ही देर में उस महिला ने ऐसा ही कर दिखाया! उसके बाद मंदिर के पुजारी ने महिला से 3 सवाल पूछे -

 1.क्या आपने किसी को फोन पर बात करते देखा?

 2.क्या आपने किसी को मंदिर में गपशप करते देखा?

 3.क्या किसी को पाखंड करते देखा?

 महिला बोली -- नहीं मैंने कुछ भी नहीं देखा!

 फिर पुजारी बोले --- जब आप परिक्रमा लगा रही थीं तो आपका पूरा ध्यान गिलास पर था कि इसमें से पानी न गिर जाए इसलिए आपको कुछ दिखाई नहीं दिया।

 अब जब भी आप मंदिर आयें तो अपना ध्यान सिर्फ़ परम पिता परमात्मा में ही लगाना फिर आपको कुछ दिखाई नहीं देगा| सिर्फ भगवान ही सर्वत्र दिखाई देगें।
इसी बात को पूजा गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज कहते हैं
श्रीरामचरितमानस के अंतर्गत


चौपाई..
'' जाकी रही भावना जैसी..
                 प्रभु मूरत देखी तिन तैसी !!
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     "राष्ट्रीय भागवत कथा प्रवक्ता"
     प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज
              "श्री धाम वृंदावन"
संपर्क सूत्र 8737866555 9453316276

Sunday, October 28, 2018

हमारे ,आप के जीवन पर आधारित ,बहुत ही ज्ञानवर्धक कथा एक बार अवश्य पढ़ें!!

हमारे ,आप के जीवन पर आधारित ,बहुत ही ज्ञानवर्धक कथा एक बार अवश्य पढ़ें!!

"कर्म करो तो फल मिलता है,                  
      आज नहीं तो कल मिलता है,
                जितना गहरा अधिक हो कुआँ,    
               उतना मीठा जल मिलता है   टक
       जीवन के हर कठिन प्रश्न का,            
                   जीवन से ही हल मिलता है !!
Pramod Krishna Shastri 

एक गाँव में एक किसान रहता था उसके परिवार में उसकी पत्नी और एक लड़का था। कुछ सालों के बाद पत्नी की मृत्यु हो गई उस समय लड़के की उम्र दस साल थी।

किसान ने दूसरी शादी कर ली। उस दूसरी पत्नी से भी किसान को एक पुत्र प्राप्त हुआ।किसान की दूसरी पत्नी की भी कुछ समय बाद मृत्यु हो गई।

किसान का बड़ा बेटा जो पहली पत्नी से प्राप्त हुआ था जब शादी के योग्य हुआ तब किसान ने बड़े बेटे की शादी कर दी।

फिर किसान की भी कुछ समय बाद मृत्यु हो गई। किसान का छोटा बेटा जो दूसरी पत्नी से प्राप्त हुआ था और पहली पत्नी से प्राप्त बड़ा बेटा दोनों साथ साथ रहते थे।

कुछ समय बाद किसान के छोटे लड़के की तबियत खराब रहने लगी। बड़े भाई ने कुछ आस पास के वैद्यों से इलाज करवाया पर कोई राहत ना मिली। छोटे भाई की दिन ब दिन तबियत बिगड़ती जा रही थी और बहुत खर्च भी हो रहा था।

एक दिन बड़े भाई ने अपनी पत्नी से सलाह की कि यदि ये छोटा भाई मर जाए तो हमें इसके इलाज के लिए पैसा खर्च ना करना पड़ेगा।

और जायदाद में आधा हिस्सा भी नहीं देना पड़ेगा। तब उसकी पत्नी ने कहा कि क्यों न किसी वैद्य से बात करके इसे जहर दे दिया जाए किसी को पता भी ना चलेगा किसी रिश्तेदारी में भी कोई शक ना करेगा कि बीमार था बीमारी से मृत्यु हो गई।

बड़े भाई ने ऐसे ही किया एक वैद्य से बात की कि आप अपनी फीस बताओ ऐसा करना मेरे छोटे बीमार भाई को दवा के बहाने से जहर देना है !

वैद्य ने बात मान ली और लड़के को जहर दे दिया और लड़के की मृत्यु हो गई।उसके भाई भाभी ने खुशी मनाई की रास्ते का काँटा निकल गया अब सारी सम्पत्ति अपनी हो गई।

उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। कुछ महीनों पश्चात उस किसान के बड़े लड़के की पत्नी को लड़का हुआ !

उन पति पत्नी ने खूब खुशी मनाई, बड़े ही लाड़ प्यार से लड़के की परवरिश की। कुछ ही गिने वर्षों में लड़का जवान हो गया। उन्होंने अपने लड़के की भी शादी कर दी!

शादी के कुछ समय बाद अचानक लड़का बीमार रहने लगा। माँ बाप ने उसके इलाज के लिए बहुत वैद्यों से इलाज करवाया। जिसने जितना पैसा माँगा दिया सब कुछ दिया ताकि लड़का ठीक हो जाए ।

अपने लड़के के इलाज में अपनी आधी सम्पत्ति तक बेच दी पर लड़का बीमारी के कारण मरने की कगार पर आ गया। शरीर इतना ज्यादा कमजोर हो गया की अस्थि-पिंजर शेष रह गया था।

एक दिन लड़के को चारपाई पर लेटा रखा था और उसका पिता साथ में बैठा अपने पुत्र की ये दयनीय हालत देख कर दुःखी होकर उसकी ओर देख रहा था!

तभी लड़का अपने पिता से बोला कि _भाई_ अपना सब हिसाब हो गया बस अब कफन और लकड़ी का हिसाब बाकी है उसकी तैयारी कर लो।

ये सुनकर उसके पिता ने सोचा की लड़के का दिमाग भी काम नहीं कर रहा है बीमारी के कारण और बोला बेटा मैं तेरा बाप हूँ भाई नहीं!

तब लड़का बोला मैं आपका वही भाई हूँ जो आप ने जहर खिलाकर मरवाया था । जिस सम्पत्ति के लिए आप ने मरवाया था मुझे अब वो मेरे इलाज के लिए आधी बिक चुकी है आपकी शेष है हमारा हिसाब हो गया !*

तब उसका पिता फ़ूट-फूट कर रोते हुए बोला कि मेरा तो कुल नाश हो गया। जो किया मेरे आगे आ गया। पर तेरी पत्नी का क्या दोष है जो इस बेचारी को जिन्दा जलाया जाएगा ।
_(उस समय सतीप्रथा थी जिसमें पति के मरने के बाद पत्नी को पति की चिता के साथ जला दिया जाता था)_
तब वो लड़का बोला की वो वैद्य कहाँ है, जिसने मुझे जहर खिलाया था। तब उसके पिता ने कहा की आप की मृत्यु के तीन साल बाद वो मर गया था।

तब लड़के ने कहा कि ये वही दुष्ट वैद्य आज मेरी पत्नी रूप में है मेरे मरने पर इसे जिन्दा जलाया जाएगा ।
हमारा जीवन जो उतार-चढ़ाव से भरा है इसके पीछे हमारे अपने ही कर्म होते हैं। हम जैसा बोएंगे, वैसा ही काटना पड़ेगा।





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Friday, October 26, 2018

भगवान भोलेनाथ होंगे प्रसन्न इस स्त्रोत का करें पाठ

भगवान भोलेनाथ होंगे प्रसन्न इस स्त्रोत का करें पाठ!!                   


नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम I
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेअहम II

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा घ्य़ान गोतीतमीशं गिरीशम I
करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोअहम II

तुश्हाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम I
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा II

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम I
  मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि II

 प्रचण्डं प्रकृश्ह्टं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम I
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं भजे.अहं भवानीपतिं भावगम्यम II

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी I
चिदानन्द संदोह मोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी II

न यावत उमानाथ पादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम I
न तावत सुखं शान्ति सन्तापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम II

न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतो.अहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम I
 जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो II

  रुद्राश्ह्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोश्हये I
 ये पठन्ति नरा भक्त्या तेश्हां शम्भुः प्रसीदति II

Thursday, October 25, 2018

कार्तिक मास को कार्तिक (दामोदर) मास क्यों कहते हैं?? कार्तिक (दामोदर) मास का क्या महत्व है??? जानिए

कार्तिक मास को कार्तिक (दामोदर) मास क्यों कहते हैं??
कार्तिक (दामोदर) मास का क्या महत्व है??? जानिए

 कार्तिक (दामोदर) मास का इतना माहत्म्य क्यों?
_क्योंकि इस मास में भगवान ने बहुत सारी लीलाएँ की हैं_....जो इस प्रकार हैं...



शरद पूर्णिमा= इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी और गोपियों के साथ रास किया था। शरद पूर्णिमा की रात्रि से ही कार्तिक मास शुरू हुआ था।

बहुलाष्टमी= यह दिन राधाकुण्ड,श्यामकुण्ड के आविर्भाव का स्मरणोत्सव है।इसी दिन श्रीकृष्ण और राधारानी ने श्यामकुंड ,राधाकुंड का निर्माण किया था ।

"रमा एकादशी"

धनतेरस= इस दिन धन्वतंरी भगवान अमृत और आयुर्वेद की औषधियों के साथ प्रकट हुए थे।

नरकाचतुर्दशी =इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था|

दामोदर लीला= इसी मास में दिवाली के दिन मैया यशोदा ने भगवान कृष्ण को उखल से बांधा था जिससे उनका नाम दामोदर पड़ा अर्थात जिनका उदर(पेट)दाम (रस्सी) से बंध गया और इसीलिए कार्तिक मास का नाम _*दामोदर मास*_ पड़ा ।

दिवाली =भगवान राम 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटे ।सभी अयोध्यावासियों ने दीप जलाये,जिसे दिवाली के रूप में आज भी हम मानते हैं ।

गोवर्धन पूजा*- दिवाली के पश्चात गोवर्धन पूजा की जाती है । भगवान कृष्ण ने अपनी बाएं हाथ की कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया था| इस दिन भगवान को _56भोग_ लगाये जाते हैं ।

 गोपष्टमी= भगवान कृष्ण ने गाय चराना शुरू किया ।

उत्थान एकादशी= (देवउठनी एकादशी) -इस दिन 4 महीनों बाद भगवान उठते हैं।इसीलिए इस एकादशी को देवउठनी एकादशी कहते हैं ।

तुलसी विवाह= भगवान श्रीकृष्ण और तुलसी महारानी का विवाह होता हैं । 
     

"कार्तिक मास में भगवान श्रीकृष्ण के आगे संध्या समय दिया अर्पण करने का विशेष महत्व है !
 " इस विषय में "
पद्म पुराण में कहा गया है....
"कार्तिक मास में मात्र एक दीपक अर्पित करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं !
Pramod Krishna Shastri 













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Wednesday, October 24, 2018

करवा चौथ व्रत का शुभ मुहूर्त ,पति पत्नी में नहीं होगा झगड़ा यह करें उपाय, पढ़ें...

करवा चौथ व्रत का शुभ मुहूर्त ,पति पत्नी में नहीं होगा झगड़ा यह करें उपाय, पढ़ें...

करवा चौथ दिनांक 27 अक्टूबर 2018 दिन शनिवार को है। 

इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निराजल व्रत रखकर रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद उसे अर्ध्य देकर व्रत खोलती हैं। 
महिलाएं सोलह श्रृंगार  करती हैं
करवा चौथ व्रत
, मंगलसूत्र, मांग टीका, बिंदिया ,काजल, नथनी, कर्णफूल, मेहंदी, कंगन, लाल रंग की चुनरी, बिछिया, पायल, कमरबंद, अंगूठी, बाजूबंद और गजरा धारण करती हैं। कुंवारी लड़कियां भी सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए यह व्रत कर सकती हैं।

 करवा चौथ पूजा का मुहूर्त शाम 5.40 से 6.47 तक व चंद्रोदय शाम 7:35 बजे। लेकिन चतुर्थी तिथि 7:58 बजे से ही शुरू हो रही है ऐसे में 7:58 के बाद ही अर्घ्य देना ठीक रहेगा।
      जिन व्यक्तिओ की पत्नी बीमार है या किसी कारण से व्रत नहीं कर सकती, उनके पति व्रत रख सकते है।   

पति - पत्नी मे झगड़ा - मनमुटाव कम करने के लिए करवाचौथ के दिन झाडू की दो सींकों को उलटा और सीधा क्रम में नीले धागे से बांधकर घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना से वैवाहिक जीवन में तनाव कम होता है।

यदि पति कहीं और आकृषित हो गया हो, पति किसी अन्य स्त्री से प्रेम करने लगा हो , अगर स्त्री किसी अन्य पुरुष से आकर्षित हो रही हो किसी दूसरे पुरुष से प्रेम करने लगी हो,वैवाहिक जीवन मे परेशानी आ रही हो, तो करवाचौथ वाले दिन गौरी शंकर नेपाली रुद्राक्ष धारण करें
        रुद्राक्ष धारण करने की विधि सबसे पहले रुद्राक्ष को गौ दुग्ध से स्नान कराएं ,गंगाजल से स्नान कराएं गाय के मूत्र से स्नान कराएं लाल रोली लगाने के बाद उसको भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर कुछ समय के लिए रख दें इसके बाद उसको धारण करें!

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एकपंडित रोज रानी के पास कथा करता था। कथा के अंत में सबको कहता कि ‘राम कहे तो बंधन टूटे....


  राष्ट्रीय भागवत कथा प्रवक्ता
 प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज
       श्री धाम वृंदावन
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