Tuesday, January 1, 2019

#समय_की_धारा_क्या_कहती_है_समझना_चाहिए

समय की धारा में जीवन निरन्तर प्रवाहमान है । समय -समय पर नई  कोपलें प्रस्फुटित  होती हैं ,
                     नए कुसुम खिलते हैं  और  अपनी सुगन्ध व सौंदर्य बिखेरकर लुप्त हो जाते हैं ।
    इसी प्रकार मानव जीवन
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भी समय के साथ गतिशील रहता है, अपनी क्षमता के अनुरूप विकास करता हैऔर अंततः समाप्त  हो जाता है ।
             समय के प्रारंभ व अंत के मध्य अनेक वर्ष आते  हैं और विलीन हो जाते हैं। नवीन वर्ष वास्तव में  नव संकल्पो , स्वप्नो , आशाओं एवं उत्साह  के जागरण का माध्यम है ।
              नवीनता  में  नव प्रारंभ का हर्ष है , कुछ करने की उंमग  है । यह निराशा , अधूरे सपनो , असफलताओ आदि  को विस्मृत कर कुछ सार्थक  एवं सकारात्मक करने की प्रेरणा प्रदान करता है।
नववर्ष अतीत से  सीख , वर्तमान के लिए सक्रियता  एवं भविष्य के लिए उम्मीद लेकर  आता है । यह कुछ श्रेष्ठ  करने , उत्कृष्ट बनने व कुछ सार्थक पाने की जिज्ञासा बनकर  हृदय को झंकृत करता है ।
                नए वर्ष की उत्साहपूर्ण मनःस्थिति , उल्लासयुक्त वातावरण में कुछ ऐसा किया जाना चाहिए , जो  हमारे जीवन को सही दिशा में विकसित होने का सुअवसर  दे सके , भीतर की क्षमताओ को जागरण कर सके और  जीवन के  औचित्य को सिद्ध कर सके ।
                  इसके लिए आवश्यक  है समय की कीमत को समझना और उसके अनुसार अपना   श्रेष्ठतम कर व्यक्तित्व की क्षमताओं को जागृत करना।
प्रकृति  ने दो अमूल्य वरदान मनुष्य को प्रदत्त किये  हैं ____ समय और क्षमता । इसमें उसने कोई भेदभाव नहीं बरता।समय सबके पास समान है और क्षमताओं के रूप भिन्न - भिन्न  हैं , किन्तु हैं सभी के पास। यह व्यक्ति पर निर्भर है कि वह  इनको कितना उपयोग में लाता है , इन पर कितना श्रम करता है और इन्हें क्या दिशा प्रदान करता है । समय व क्षमताओं के  सदुपयोग हेतु अनिवार्य शर्त है ____ वर्तमान में जीवन जीने  की । व्यक्ति वर्तमान में उतरना नहीं चाहता , स्वयं को उसके  साँचे में गढ़ना नही चाहता और इसी कारण अपनी क्षमताओं  के विकास व उपयोग से भी वंचित रह जाता है ।इसी के साथ आपको नए साल 2019 की अनंत शुभ कामनायें ईश्वर आपकी इस वर्ष में हर मनोकामना पूर्ण करें.......

राष्ट्रीय भागवत कथा प्रवक्ताप्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज      श्री धाम वृंदावनसंपर्क सूत्र = 8737866555


Saturday, December 29, 2018

#prem_ki_dor_bahut_majbut_hoti_hai

💞प्यारे प्रेम की डोर बहुत नाज़ुक होती है,, लेकिन मजबूत भी इतनी होती है कि ,वह ईश्वर को भी बांध सकती है💞!!
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Friday, December 28, 2018

#दैनिक_पंचांग

|| दैनिक पंचांग ||
दिनाँक -   २९ दिसम्बर २०१८
दिन -       शनिवार
विक्रम संवत - २०७५
 विरोधकृत नाम सम्वतसर
शक संवत -    १९४०
अयन  -   दक्षिणायन
ऋतु -      शिशिर
मास -      पौष
पक्ष -      कृष्ण
तिथि -  सप्तमी/अष्टमी
नक्षत-    उ.फा.दिन मे १:५६ तक पश्चात् हस्त
योग -     सौभाग्य/शोभन
करण -    बालव/कौलव
दिशासूल - पूर्व दिशा
सूर्योदय 🌞 - ६:५२
सूर्यास्त🌑 - १७:२७
सूर्य     -  धनु राशि
चन्द्रमा  - कन्या राशि
मंगल -    मीन राशि
बुध     --  वृश्चिक राशि (मार्गी)
गुरु     --   वृश्चिक राशि
शुक्र --      तुला राशि
शनि    --   धनु राशि
राहु     --   कर्क  राशि मे
केतु     --  मकर राशि
शिव जी का वास - आज दिन मे ८:३९ तक ज्ञावेलायां पश्चात् श्मसान मे
अग्नि का वास- आज पृथ्वी मे
राहुकाल -  आज दिन से ९:४८ से ११:०६ तक
राहु का वास   आज वायव्य मे
चन्द्रमा का वास - आज  दक्षिण मे
अभिजित मुहूर्त - आज दिन मे १२:०० से १२:४३ तक
मूल    -  आज नही है
भद्रा  -   आज नही है
पंचक -  नही है
गुरु तारा -   उदित
शुक्र तारा  - उदित
विषेश-खरमास चल रहा है।
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प्रमोद कृष्ण शास्त्री जी महाराज
     श्री धाम वृंदावन मथुरा
8737866555 9453316276

Sunday, December 23, 2018

#Krishna_Pram_by_Pramod_krishna_Shastri

💗नाता तुमसे बना के साँवरे 
      जिंदगी को  मेने सवाँर लीया!!
  गिराया जब भी जमाने की इस भीड़ ने मुझे,
    हाथ तुमने मेरा थाम लिया !!
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Monday, December 17, 2018

#Ye_To_Prem_Ki_Baat_Hai_Pramod_Krishna_Shastri

कन्हैया तुझ में बात क्या है यह तो पता नहीं
लेकिन बात बात में तेरी ही बात किया करते हैं!!
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Wednesday, December 12, 2018

#किसी_का_भी_जीवन_चुनौतिओं_से_रहित_नहीं_है_लेकिन_उनका_सामना_हम_कैसे_करते_हैं_यह_समझना_है

महाभारत में कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा "मेरी माँ ने मुझे जन्मते ही त्याग दिया, 
              क्या ये मेरा अपराध था कि मेरा जन्म एक ऐसे बच्चे के रूप में हुआ? जिसके कारण किसी ने मुझे सम्मान ही नहीं दिया ,

दोर्णाचार्य ने मुझे शिक्षा देने से मना कर दिया क्योंकि वो मुझे         क्षत्रीय नही मानते थे, क्या ये मेरा कसूर था..

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श्री कृष्ण मंद मंद मुस्कुराते हुए बोले-
"कर्ण, मेरा जन्म जेल में हुआ था। मेरे पैदा होने से पहले मेरी मृत्यु मेरा इंतज़ार कर रही थी। जिस रात मेरा जन्म हुआ ...उसी रात मुझे मेरे माता-पिता से अलग होना पड़ा...

मैने गायों को चराया और गोबर को उठाया।
जब मैं चल भी नही पाता था.. तो मेरे ऊपर प्राणघातक हमले हुए।

कोई सेना नही, कोई शिक्षा नही, कोई गुरुकुल नही, कोई महल नही, मेरे मामा ने मुझे अपना सबसे बड़ा शत्रु समझा। बड़े होने पर मुझे ऋषि सांदीपनि के आश्रम में जाने का अवसर मिला।

मुझे बहुत से विवाह राजनैतिक कारणों से या उन स्त्रियों से करने पड़े ...जिन्हें मैंने राक्षसों से छुड़ाया था!
जरासंध के प्रकोप के कारण मुझे अपने परिवार को यमुना से ले जाकर सुदूर प्रान्त मे समुद्र के किनारे बसाना पड़ा...

हे कर्ण!--किसी का भी जीवन चुनौतिओं से रहित नहीं है। सबके जीवन मे सब कुछ ठीक नहीं होता ...
सत्य क्या है और उचित क्या है? ये हम अपनी आत्मा की आवाज़ से स्वयं निर्धारित करते हैं!

इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कितनी बार हमारे साथ अन्याय होता है,
इस बात से कोई फर्क नही पड़ता* कितनी बार हमारा अपमान होता है,
इस बात से भी कोई फर्क नही पड़ता* कितनी बार हमारे अधिकारों का हनन होता है।

फ़र्क़ सिर्फ इस बात से पड़ता है कि हम उन सबका सामना किस प्रकार कर्मज्ञान के साथ करते हैं..!!

 कर्मज्ञान है तो ज़िन्दगी हर पल मौज़ है वरना समस्या तो सभी के साथ रोज है




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Monday, December 10, 2018

#अच्छे_लोगो_के_साथ_ही_बुरा_क्यो_होता_है_???


अच्छे लोगो के साथ ही बुरा क्यो होता है ???

 सुनहु भरत भावी प्रबल बिलखि कहेउ मुनिनाथ।
      हानि लाभु जीवनु मरनु जसु अपजसु बिधि हाथ॥

भावार्थ:-मुनिनाथ ने बिलखकर (दुःखी होकर) कहा- हे भरत! सुनो, भावी (होनहार) बड़ी बलवान है। हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-अपयश, ये सब विधाता के हाथ हैं॥

स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने दिया इसका उत्तर, जाने,,,,,

अच्छे लोगो के साथ ही बुरा क्यो होता है, यह सवाल कई लोगो  मैंने तो किसी का बुरा नही किया, फिर मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ।


                            मैं तो सदैव ही धर्म और नीति के मार्ग का पालन करता हूँ, पर मेरे साथ हमेशा बुरा क्यो होता है। ऐसे कई विचार अधिकांश लोगों के मन मे आते होंगे।
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ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने दिए हैं। एक बार अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण से पूछते हैं कि हे वासुदेव! अच्छे और सच्चे बुरे लोगो के साथ ही बुरा क्यो होता है, इस पर भगवान श्री कृष्ण ने एक कहानी सुनाई। इस कहानी में हर मनुष्य के सवालों का जवाब वर्णित है।

श्री कृष्ण कहते हैं, कि एक नगर में दो पुरूष रहते थे। पहला व्यापारी जो बहुत ही अच्छा इंसान था, धर्म और नीति का पालन करता था, भगवान की भक्ति करता था और मन्दिर जाता था। वह सभी तरह के गलत कामो से दूर रहता था।

वहीं दूसरा व्यक्ति जो कि दुष्ट प्रवत्ति का था, वो हमेशा ही अनीति और अधर्म के काम करता था।
              वो रोज़ मन्दिर से पैसे और चप्पल चुराता था, झूठ बोलता था और नशा करता था। एक दिन उस नगर में तेज बारिश हो रही थी और मन्दिर में कोई नही था, यह देखकर उस नीच व्यक्ति ने मन्दिर के सारे पैसे चुरा लिए और पुजारी की नज़रों से बचकर वहाँ से भाग निकला, थोड़ी देर बाद जब वो व्यापारी दर्शन करने के उद्देश्य से मन्दिर गया तो उस पर चोरी करने का इल्ज़ाम लग गया।

वहाँ मौजूद सभी लोग उसे भला – बुरा कहने लगे, उसका खूब अपमान हुआ। जैसे – तैसे कर के वह व्यक्ति मन्दिर से बाहर निकला और बाहर आते ही एक गाड़ी ने उसे टक्कर मार दी। वो व्यापारी बुरी तरह से चोटिल हो गया।

उसी समय उस दुष्ट को एक नोटो से भरी पोटली हाथ लगी, इतना सारा धन देखकर वह दुष्ट खुशी से पागल हो गया और बोला कि आज तो मज़ा ही आ गया। पहले मन्दिर से इतना धन मिला और फिर ये नोटों से भरी पोटली।

दुष्ट की यह बात सुनकर वह व्यापारी दंग रह गया। उसने घर जाते ही घर मे मौजूद भगवान की सारी तस्वीरे निकाल दी और भगवान से नाराज़ होकर जीवन बिताने लगा।

सालो बाद जब उन दोनों की मृत्यु हो गयी और दोनों यमराज के सामने गए तो उस व्यापारी ने नाराज़ स्वर में यमराज से प्रश्न किया कि मैं तो सदैव ही अच्छे कर्म करता था, जिसके बदले मुझे अपमान और दर्द मिला और इस अधर्म करने वाले दुष्ट को नोटो से भरी पोटली…आखिर क्यों?

व्यापारी के सवाल पर यमराज बोले जिस दिन तुम्हारे साथ दुर्घटना घटी थी, वो तुम्हारी ज़िन्दगी का आखिरी दिन था, लेकिन तुम्हारे अच्छे कर्मों की वजह से तुम्हारी मृत्यु एक छोटी सी चोट में बदल गयी।

वही इस दुष्ट को जीवन मे राजयोग मिलने की सम्भावनाएं थी, लेकिन इसके बुरे कर्मो के चलते वो राजयोग एक छोटे से धन की पोटली में बदल गया।

श्रीकृष्ण कहते हैं कि भगवान हमे किस रूप में दे रहे हैं, ये समझ पाना बेहद कठिन होता है। अगर आप अच्छे कर्म कर रहे हैं और बुरे कर्मो से दूर हैं, तो भगवान निश्चित ही अपनी कृपा आप पर बनाए रखेंगे।

जीवन मे आने वाले दुखों और परेशानियों से कभी ये न समझे कि भगवान हमारे साथ नही है, हो सकता है आपके साथ और भी बुरा होने का योग हो, लेकिन आपके कर्मों की वजह से आप उनसे बचे हुए हो।       !!RADHEY RADHEY!!

    

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